इरफान खान जीवनी | Irrfan Khan Biography In Hindi

इरफान खान जीवनी | Irrfan Khan Biography In Hindi

इरफ़ान खान का जन्म और पढ़ाई

इरफ़ान खान ( साहबजादे इरफ़ान अली खान ) का जन्म ७ जनवरी १९६७ को जयपुर राजस्थान में हुआ था। इरफ़ान का जन्म एक मुस्लिम परिवार में हुआ था उनकी माँ का नाम सईदा बेगम और पिता का नाम यासीन अली खान था। इरफ़ान क्रिकेट के अच्छे खिलाडी भी थे उनका चुनाव सि के नायडु ट्रॉफी के लिए हुआ था ( वर्ष गठ २३ में )राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से पहले इरफ़ान ने राजस्थान से MA पूर्ण किया। १९८४ में इरफ़ान अभिनय सीखने के लिए राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय गए।

इरफ़ान खान का करियर और फिल्मोग्राफी

Irrfan Khan Biography In Hindiइरफ़ान को राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में स्नातक स्तर की पढाई करने के बाद १९८७ में एक छोटा किरदार मिला मीरा नायर द्वारा निर्देशित सलाम बॉम्बे । पर सलाम बॉम्बे में उनके दृश्य कोई असरदार जगह न बना सके। इरफ़ान दूरदर्शन पर एक टेलीप्ले में लेनिन का किरदार निभाया ,जिसका शीर्षक था लाल घास पर नीले घोड़े। वह एक रुसी नाटक था मिखाइल शत्रोव द्वारा और उसका अनुवाद उदय प्रकाश ने किया था। फिर उन्हें स्टार बस्टेलर्स के धारावाहिक डर में एक फीको किलर के रूप में दिखाया गया जो इस कार्यक्रम का मुख्य प्रतिरोधी था।

इरफ़ान ने अली सरदार जाफरी द्वारा निर्मित कहकशा में सुप्रसिद्ध क्रांतिकारी उर्दू कवी और भारत के मार्क्सवादी राजनैतिक कार्यकर्ता मखदूम मोहिउद्दीन की भूमिका निभाई। उन्होंने स्टार बेस्टसेलर्स नमक धारावाहिक के कुछ भाग में भी काम किया जो कि स्टार प्लस पर प्रसारित होता था। वह दो भाग के लिए भंवर नमक एक धारावाहिक में भी दिखाई दिए जो सेट इण्डिया पर प्रसारित होता था। इसके बाद उन्होंने बासु चटर्जी की समीक्षकों द्वारा प्रशंसित ड्रामा फिल्म “कमला की माँ ” (१९८९) में रूपा गांगुली के सथब्सत अभिनय किया।

इरफ़ान ने १९९० के दशक में कई टेलीविजन धारावाहिको में काम किया ,जिनमें चाणक्य ,भारत एक खोज, सारा जहा हमारा , बानगी अपना चाँद , चंद्रकांता शामिल है | १९९० के दशक में , वे समीक्षकों द्वारा प्रशंसित फिल्म एक डॉक्टर की नौकरी और इतनी लम्बी यात्रा (१९९८) और कई अन्य फिल्मो में दिखाई दिए ,पर ये फिल्मे जनता का ध्यान आकर्षित करने में असफल रही। १९९८ में इरफ़ान ने संजय खान के धारावाहिक “जय हनुमान” में ‘रत्नाकर’ द बैंडिट की भूमिका निभाई। 

द वॉरियर” में इरफ़ान ने मुख्य भूमिका निभाई जो ‘आसिफ कपाड़िया’ द्वारा निर्मित फिल्म थी जो एक ऐतिहासिक फिल्म थी जो ११ सप्ताह में राजस्थान और हिमाचल प्रदेश में पूरी हुई थी। द वॉरियर अंतरराष्ट्रीय फिल्म समरोह में खोली गयी २००१ में जिससे इरफान को शोहरत मिली 
२००३ से २००४ के बीच ,रोड टू लद्दाख में अभिनय किया जो की एक लघु फिल्म थी और अश्विन कुमार द्वारा निर्मित थी। उसी वर्ष उन्होंने समीक्षकों द्वारा प्रशंसित मकबूल में ,शेक्सपियर के मेकबेथ के एक रूपांतर में शीर्षक भूमिका निभाई। 

२००५ की फिल्म रोग में इरफ़ान लीड रोले में नज़र आये इस फिल्म को दर्शको ने पसंद किया और इरफ़ान की प्रशंसा में कहा ” इरफ़ान की आँखे उनके शब्दों की तुलना में जोर से बोलती है और हरबार जब फ्रेम में होते है थो वह अपने दोस्त मनीष से बात कर रहे हो या सुहैल के साथ बहस कर हो,वह अभिनेता के रूप में क्षमता दिखते है ,इसके बाद वह कई फिल्मो में मुख्य भूमिका निभाते हुए या खलनायक के रूप में, सहायक भूमिका में नज़र आये। २००४ में उन्हों फिल्म हासिल में अपनी भूमिका के सर्वश्रेष्ठ खलनायक का फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला। इरफ़ान ने तेलगु फिल्म सैनिककुडू में एक विरोधी की भूमिका निभाई है। 

२००७ की मैट्रो के लिए इरफ़ान को सर्वश्रेष्ठ सहायक भूमिका के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार मिला। मैट्रो में कोंकणा सेन के साथ उनकी केमिस्ट्री ,मल्टीस्टार फिल्म की मुख्या आकर्षण थी। मैट्रो बॉक्स ऑफिस पर हिट साबित हुई। बॉलीवुड में अपनी सफलता के बाद भी इरफ़ान ने अपने टेलीविजन कर्रियर को जारी रखा। इरफ़ान एक धारावाहिक मानो या ना मानो है प्रदर्शन किया जो स्टारवन पर प्रसारित होता था | इरफ़ान ने २००८ में स्लमडॉग मिलियनेयर में एक पुलिस निरीक्षक की भूमिका निभाई,जिसके लिए उन्होंने और फिल्म के कलाकारों ने मोशन पिक्चर में कास्ट द्वारा उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए स्क्रीन एक्टर्स गिल्ड अवार्ड जीता। उनके बारे में डैनी बॉयल ने कहा “इरफ़ान के पास किसी भी चरित्र के नैतिक केंद्र को खोजने का एक सहज तरीका है ,जिस कारन हम स्लमडॉग में हम देखते है की पुलिसकर्मी वास्तव में निष्कर्ष है की जमाल निर्दोष है। बॉयल ने इरफ़ान की तुलना एक ऐथलीट से की जो अपनी पूरी दौड़ को एक ही चल में ख़त्म कर सकता है यह देखने लायक दृश्य है। 

२००९ में उन्होंने “एसिड फैक्ट्री” में अभिनय किया। २००९ में आई फिल्म न्यूयोर्क में FBI एजेंट का अभिनय किया। २०१० ने HBO सीरीज इन ट्रीटमेंट के तीसरे सीजन में काम किया। २०१२ में द अमेजिंग स्पाइडर मैन में डॉ :रजीत रथा का किरदार निभाया। फिल्म लाइफ ऑफ़ पाई में पिसिन पाई मोलिटर पटेल का अभिनय किया। लाइफ ऑफ़ पाई पूरी दुनिया में कामयाब फिल्म साबित हुए। 

फिर आयी २०१२ में पान सिंह तोमर में उनकी मुख्य भूमिका थी , वास्तविक जीवन के एथलीट डकैत के रूप में ,उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। २०१३ में , इरफ़ान द लंचबॉक्स में अभिनय किया ,जिसने फिल्म फेस्टिवल में ग्रैंड रैल डी’ओ आर जीता और BAFTA Nomination प्राप्त किया ,और तब तक की उनकी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्म बन गई। २००१४ में इरफ़ान गुंडे में दिखाई दिए ,जो बॉक्स ऑफिस पर एक सफल फिल्म थी। इरफ़ान ने फिल्म एक्सपोज़ और हैदर में अथिति भूमिकाये निभाई।

२०१५ में इरफ़ान दीपिका पादुकोण और अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म पिकू में मुख्य भूमिका में नज़र आए। उसी वर्ष थ्रिलर ‘तलवार‘ में भी दिखाई जिसमे उनके प्रदर्शन की प्रशंसा की गई थी। अक्टूबर २०१५ में ऐश्वर्या राय के साथ इरफ़ान जज़्बा में दिखाई दिए जिसमे उनके प्रदर्शन की प्रशंसा की गयी थी। इरफ़ान को २०१६ में रौनी हॉवर्ड द्वारा निर्मित थ्रिलर “इन्फर्नो “में देखा गया। उसी वर्ष उन्होंने निशिकांत कामत द्वारा निर्देशित २०१६ की भारतीय सामाजिक थ्रिलर फिल्म “मदारी ” में भी अभिनय किया। 

२०१७ में इरफ़ान हिंदी मीडियम और करीब करीब सिंगल में दिखाई दिए। हिंदी मीडियम में राज बत्रा के रूप में इरफ़ान को कई प्रशंसाइए मिली। जिनमें से एक सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार था। हिंदी मीडियम भारत चीन में स्लीपर हिट बन गयी। द लंचबॉक्स को पार करते हुए ,हिंदी मीडियम इरफ़ान की सबसे ज्यादा कमाइकरने वाली हिंदी फिल्म बन गयी। उन्होंने २०१७ में नो बीएड ऑफ़ रोजेज में अभिनय किया।  २०१७ तक इरफ़ान की फिल्मो ने दुनिया भर में बॉक्स ऑफिस पर करीब $4 बिलियन की कमाई की। २०१८ में इरफ़ान कारवाँ ,ब्लैकमेल और पजल में दिखाई दिए (पजल हॉलीवुड फिम थी )इरफ़ान की अंतिम फिल्म होमी अदजानिया द्वारा निर्देशित अंग्रेजी मीडियम थी,जिसे १३ मार्च २०२० को रिलीज़ किया गया था। 

इरफ़ान खान को मिले अवार्ड और पुरस्कार

2004 – फिल्म हासिल में अपनी भूमिका के सर्वश्रेष्ठ खलनायक का फिल्मफेयर पुरस्कार, स्क्रीन पुरस्कार
2007 – मैट्रो के लिए इरफ़ान को सर्वश्रेष्ठ सहायक भूमिका के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार, आइफा पुरस्कार, स्क्रीन पुरस्कार
2008 – मोशन पिक्चर में कास्ट द्वारा उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए स्क्रीन एक्टर्स गिल्ड अवार्ड
2011 – भारत सरकार की तरफ से पद्मश्री
2011 – आंतरराष्ट्रीय सिनेमा में आउटस्टैंडिंग अचीवमेंट पुरस्कार
2012 – CNN – IBN का इंडियन ऑफ़ दी ईयर
2013 – फ़िल्म पान सिंघ तोमर के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, फिल्मफेयर पुरस्कार, टाइम्स ऑफ़ इंडिया पुरस्कार, स्क्रीन पुरस्कार
2013 – फ़िल्म लंचबॉक्स के लिए एशियाई फिल्म पुरस्कार, दुबई इंटरनेशनल फ़िल्म पुरस्कार, स्क्रीन पुरस्कार
2016 – फ़िल्म तलवार के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का स्क्रीन पुरस्कार
2017 – हिंदी मीडियम के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार, आइफा पुरस्कार और स्क्रीन पुरस्कार

इरफ़ान खान का मृत्यु

वर्ष 2018 में उन्हें न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर का पता चला था, जिसके बाद वह एक साल तक इलाज के लिए ब्रिटेन में रहे। एक साल की रहत के बाद ,वह फिर से बृहदान्त्र संक्रमण के साथ मुंबई में भर्ती हो गए ,इसी बिच उन्होंने अपनी फिल्म अंग्रेजी मीडियम की शूटिंग की जो उनकी आखरी फिल्म थी। २९ अप्रैल २०२० को मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में निधन हो गया जहा उन्हें बृहदान्त्र संक्रमण के साथ भर्ती कराया गया था ,ठीक चार दिन पहले ,उनकी माँ का जयपुर में निधन हो गया था ,इरफ़ान लोखड़ौन और अपनी बीमारी के चलते अपनी माँ के अंतिम संस्कार में पहुंच न सके। 

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